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पटना : राजभवन के स्तर पर अभी मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी नहीं है, लेकिन अब ऐसा हो जाएगा। ऐसा इसलिए कि ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के फॉर्मूले के तहत भारतीय जनता पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने सीएम नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। उनकी जगह भाजपा से एक कद्दावर चेहरे के साथ आज शाम या गुरुवार सुबह नीतीश कुमार सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार कर लिया जाएगा। इस्तीफे की सूचना राजभवन तक पहुंचा दी गई है और विस्तार के लिए समय भी मांगा गया है।
दिलीप जायसवाल ने की इस्तीफे की पेशकश
28 फरवरी से बिहार विधानमंडल का बजट सत्र शुरू हो रहा है। उसके पहले 25 फरवरी को अचानक नीतीश कुमार मंत्रिपरिषद् की बैठक हुई तो यह मान लिया गया कि अब अगले बजट को लेकर सरकार तैयारी में है। इस बीच 26 फरवरी को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने पहली बार अपने मुंह से कह दिया कि वह ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के फॉर्मूले के तहत संगठन का काम करेंगे और मंत्रिपरिषद् से इस्तीफा दे देंगे। इसके बाद ही फिज़ा में मंत्रिमंडल विस्तार की खबर तेजी से उछली। कुछ ही देर बाद जायसवाल का इस्तीफा राजभवन भी चला गया। राजभवन को पहुंचे इस्तीफे के साथ ही मंत्रिमंडल के नए सदस्यों के शपथ के लिए राज्यपाल से समय भी मांगा गया है।
नए मंत्रियों की नियुक्ति को लेकर विचार विमर्श चल रहा
इधर, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में नए मंत्रियों की नियुक्ति को लेकर विचार विमर्श किया जा रहा है और जल्द ही इस प्रक्रिया को पूरा किया जा सकता है। दिलीप जायसवाल के इस्तीफे के बाद, यह देखने वाली बात होगी कि सरकार नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह देती है या फिर किसी अन्य रणनीति पर काम करती है। वहीं जिन मंत्रियों के पास एक से अधिक विभाग है, उसमें भी फेरबदल होने की संभावना है। जुलाई में जब जायसवाल को बिहार भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया, तभी से उनके इस्तीफे का इंतजार था क्योंकि पार्टी में कोई एक व्यक्ति एक ही बड़े पद पर रह सकता है।
मंत्रिमंडल विस्तार में जातीय समीकरण का खास ध्यान
सूत्रों की मानें तो आगामी विधानसभाा को देखते हुए नीतीश सरकार में इस बार पांच से छह नए चेहरों को मंत्री बनने का मौका मिल सकता है। इस विस्तार में भाजपा कोटे से तीन से चार और जदयू कोटे से एक से दो को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। इधर, जीतन राम मांझी की पार्टी के ओर से भी एक और मंत्री मद की मांग हो रही है। सूत्र बता रहे हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार में जातीय समीकरण का खास ध्यान रखा जा रहा है। संभवना है कि अगड़ी जाति (राजपूत और भूमिहार) से दो मंत्रियों को मौका मिल सकता है। वहीं अतिपिछड़ा वर्ग से भी दो और पिछड़ा वर्ग से एक को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। कुर्मी समाज के एक प्रतिनिधि को भी मंत्री बनाए जाने की चर्चा है।