बिलासपुरः ऑनलाइन सट्‌टे पर शिकंजा, 2 ब्रांच हेड गिरफ्तार, मास्टरमाइंड ने भिलाई में की इंजीनियरिंग, पुणे जाकर दुबई के सट्‌टेबाज का संभाला कारोबार,अकाउंट खंगाल रही पुलिस 

बिलासपुर के सट्‌टेबाजों का महाराष्ट्र और दुबई से जुड़े तार। - Dainik Bhaskar

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन सट्‌टेबाजों के दुबई कनेक्शन तक पुलिस ने पहुंचने का दावा किया है। पुलिस की टीम ने इस केस में महाराष्ट्र से दो ब्रांच हेड को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ में ऑनलाइन सट्‌टेबाजों के कॉर्पोरेट अकाउंट की भी जानकारी मिली है। उनके पास से पुलिस ने लैपटॉप, चार मोबाइल और नकदी बरामद किया है। बिलासपुर पुलिस ने अब तक महादेव और रेड्‌डी अन्ना के पांच ब्रांच में दबिश देकर हेड सॉफ्टवेयर इंजीनियर और उसके साथियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

ऑनलाइन सट्टा एप महादेव और रेड्डी के चार सटोरियों को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार किया था। उनसे पूछताछ के आधार पर जानकारी मिली कि सटोरिए किराए पर अकाउंट लेकर रकम का लेनदेन करते थे। इस केस में पुलिस ने अकाउंट किराए पर देने वाले मेट्रोमोनियल कंपनी चलाने वाले संचालक और उसके साथियों को भी गिरफ्तार किया है, जिन्होंने बैंक एकाउंट किराए में देने का झांसा देकर धोखाधड़ी की है।

पुलिस की जांच में पता चला है कि चकरभाठा में रहने वाला जगदीप सिंह (37) महाराष्ट्र के पुणे से सट्टे का ब्रांच चलाता है। वह चकरभाठा के रोहित गिडवानी (30) के साथ मिलकर सट्टे का कारोबार करता है। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की, तब पता चला उन्होंने सट्‌टा चलाने के लिए मोटी रकम देकर ब्रांच कोड लिया था। पुलिस का दावा है कि ऑनलाइन सट्‌टेबाजों का बड़ा कनेक्शन हाथ लगा है, जिसका शीघ्र ही पर्दाफाश किया जाएगा। इसमें इनका दुबई कनेक्शन होने की बात भी सामने आई है।

महादेव और रेड्‌डी अन्ना सटोरियों का कुंडली खंगाल रही पुलिस।

महादेव और रेड्‌डी अन्ना सटोरियों का कुंडली खंगाल रही पुलिस।

69% खुद रखते हैं संचालक, 12% के लिए काम करते हैं ब्रांच हेड
चकरभाठा निवासी गिरफ्तार आरोपी जगदीप सिंह साफ्टवेयर इंजीनियर है। उसने 2007 में भिलाई से पास आउट किया है। फिर बाद में वह सट्टे के कारोबार से जुड़ गया और पुणे में अपना ठिकाना बना लिया। उसने पूछताछ में बताया कि सौरभ और रवि नाम के युवक मास्टरमाइंड हैं, जो दुबई से काम कर रहे हैं। कमाई का 69% हिस्सा संचालक का होता है और 12% ब्रांच हेड को दिया जाता है। गुजरात के राजकोट में रहने वाले राकेश राजदेव ने उन्हें 11% कमीशन में ब्रांच दिलाया था। पुलिस का दावा है कि ऑनलाइन सट्‌टेबाज लेनदेन का पूरा खेल अकाउंट से करते हैं और वे कॉर्पोरेट अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं। कॉर्पोरेट अकाउंट में लाखों और करोड़ों रुपए का लेनदेन किया जा सकता है। पुलिस उनका कॉर्पोरेट अकाउंट खंगालने में जुटी हुई है।

पुलिस की टीम सटोरियों पर लगातार कार्रवाई कर रही है।

पुलिस की टीम सटोरियों पर लगातार कार्रवाई कर रही है।

अब पुलिस के टारगेट में है चेकर
पुलिस अफसरों ने बताया कि ऑनलाइन सट्‌टे के इस कारोबार में ब्रांच के नीचे काम करने के लिए 6 व्यक्ति 3 लैपटॉप 6 बैंक अकाउंट और 10-12 मोबाइल की जरूरत होती है। प्रत्येक ब्रांच के ऊपर एक चेकर होता है, जो ब्रांच में काम करने वालों की एक्टिविटी पर नजर रखता है। एक चेकर के नीचे 5 ब्रांच होता है और पुलिस को करीब 200 चेकर की जानकारी मिली है। पुलिस का अगला टारगेट चेकर्स हैं, जिनके खिलाफ शीघ्र ही कार्रवाई करने का दावा किया जा रहा है।

युवाओं को लालच देकर बुलाए जा रहे महानगर
ऑनलाइन सट्‌टे के इस कारोबार में एडमिन अपने लाभ के लिए अपने बनाए एजेंट का ही उपयोग करते हैं। ऐसे में खास बात यह है कि कम समय में अधिक सैलरी और लाभ के लालच में रवि, सौरभ, पिंटू, हरीश, राज, चीकू नितिन, एआर, डी के जैसे बड़े सटोरियों ने ठिकाना बदल दिया है। वे ब्रांच में कार्य करने के लिए युवाओं को लालच देकर दिल्ली, चंडीगढ़, पुणे, मुंबई, गोवा, दुबई बुला रहे हैं।