Rajasthan Politics: गहलोत को क्लीन चिट देने के पीछे कांग्रेस का है बड़ा प्लान! ‘जादूगर’ या पायलट कौन झुकेगा? 

अशोक गहलोत, सोनिया गांधी और सचिन पायलट

अशोक गहलोत, सोनिया गांधी और सचिन पायलट 

जयपुर। राजस्थान का सियासी संकट हर दिन एक नया मोड़ ले रहा है। गहलोत गुट के बगावत के बाद आलाकमान ने सख्ती दिखाई और तीन नेताओं महेश जोशी, शांति धारीवाल और धर्मेंद्र राठौड़ को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद विधायकों के तेवर ढीले पड़े और कई ने अपना सुर बदल लिया। हालांकि, इस पूरे मामले में अशोक गहलोत को क्लीन चिट दी गई। ऐसे में रेस से बाहर हो चुके गहलोत की एक बार फिर अध्यक्ष पद के रेस में वापसी हो गई है। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या वजह है कि कांग्रेस आलाकमान ने गहलोत को लेकर नरमी दिखाई है। 

राजस्थान में बड़ा संकट टालने की कोशिश
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके समर्थक नहीं चाहते हैं कि वे सीएम पद का त्याग करें। अगर गहलोत सीएम पद छोड़ते भी हैं तो सचिन पायलट सीएम के तौर पर उन्हें स्वीकार नहीं हैं। सचिन पायलट और गहलोत के बीच द्वंद की कहानी तो बहुत पुरानी है लेकिन इस बार पायलट के चक्कर में गहलोत गुट ने आलाकमान को चुनौती दे दी। ऐसे में लड़ाई गहलोत गुट बनाम कांग्रेस आलाकमान हो गई लेकिन अब गहलोत को क्लीन चिट मिलने के बाद लग रहा है कि आलाकमान अशोक गहलोत को एक और मौका देना चाहती है। कहा जा रहा है कि गहलोत को क्लीन चिट देकर राजस्थान में किसी बड़े संकट को टालने की कोशिश की गई है। इसके साथ कांग्रेस अध्यक्ष के लिए फेस शेविंग भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। 

गहलोत को समझाने की कोशिश
सीएम अशोक गहलोत दिल्ली दौरे पर जाने वाले हैं। सचिन पायलट पहले से ही दिल्ली में मौजूद हैं। खबर है कि अशोक गहलोत भले ही राजस्थान की गद्दी नहीं छोड़ना चाहते हो लेकिन कांग्रेस आलाकमान उन्हें मनाने की कोशिश करेगा। आनंद शर्मा, अंबिका सोनी समेत कई वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी दी कि वे गहलोत को समझाएं। इसके साथ ही अशोक गहलोत को समझाया जा रहा है कि वे राजस्थान का सीएम चुनने का फैसला सोनिया गांधी पर छोड़ दें। तभी उनकी नाराजगी दूर हो सकती है। 

कांग्रेस का प्लान बी भी तैयार
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस ने प्लान बी भी तैयार करके रख लिया है। अगर अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष के नामांकन के लिए तैयार नहीं होते हैं तो कांग्रेस के दूसरे वरिष्ठ नेता नामांकन दाखिल करेंगे। ऐसे में गहलोत के साथ कई कांग्रेस के दिग्गज 29 से 30 सितंबर तक दिल्ली में डेरा डालेंगे। कांग्रेस हाईकमान ने अध्यक्ष पद के नामांकन के लिए मीरा कुमार, मल्लिकार्जुन खड़गे, कुमारी शैलजा, दिग्विजय सिंह, मुकुल वासनिक जैसे नेताओं को भी तैयार रहने को कहा है। वहीं शशि थरूर 30 सितंबर को नामांकन दाखिल कर सकते हैं।

इस पूरे सियासी ड्रामे में गहलोत गुट की किरकरी हुई है। वहीं एक बार फिर गहलोत को अध्यक्ष पद पर नामांकन करने के लिए राजी किया जा रहा है। ऐसे में सचिन पायलट की डूबती नाव को सहारा मिला है। कहा जा रहा है कि सोनिया गांधी सचिन पायलट के पक्ष में फैसला कर सकती हैं। अब सचिन पायलट सोनिया गांधी की पसंद बने हुए हैं। कांग्रेस आलाकमान की कोशिश है कि बिना किसी कड़े एक्शन के इस संकट से निपटा जाए। इसलिए गहलोत को समझाने की कोशिश की जा रही है। 

पायलट की चुप्पी के पीछे ये वजह
कांग्रेस विधायक सचिन पायलट इस समय वेट एंड वॉच की स्थिति में है। इसके साथ वे अपनी छवि को लेकर अलर्ट हैं। इसका उदाहरण कल देखने को मिला। एक खबर एजेंसी ने पायलट की सोनिया गांधी से बात करने की खबर चलाई। जिसके तुरंत बाद सचिन पायलट ने खबर का खंडन किया। पायलट ने ट्वीट करते हुए लिखा कि ‘मुझे डर है कि झूठी खबर रिपोर्ट की जा रही है’। इससे साफ है कि वे इस घड़ी में अपनी छवि को लेकर अलर्ट हैं। आलाकमान के फैसले से पहले कोई रिस्क नहीं लेना चाहते।